धूमवती साधना सिद्धि या महाविद्या के किसी भी रूप में साधना तभी संभव होती है जब साधक को उसके समस्त रहस्यों का पता हो और वीर भाव से उस साधना को करने के लिए साधक संकल्पबद्ध हो । डर डर के साधना करने या साधना के नियम का पालन न करते हुए या किसी लालच या किसी वीरोचित भावना में रहते हुए साधना करना कभी भी सफल नहीं होती है । मर्यादित जीवन जीते हुए और अपने ईस्ट या आराध्य के प्रति समर्पित रहते हुए ही साधना की जा सकती है । धूमावती साधना से जीवन में सभी प्रकार के ऊपरी बाधा, तंत्र मंत्र बाधा, भूत प्रेत बाधा या परिवार में हो रहे किसी गंभीर पारलौकिक घटना को रोका जा सकता है और सत्रु पे विजय प्राप्त करते हुए जीवन में सुख साधन समृद्धि पायी जा सकती है । यदि किसी उच्च कामना पूर्ति के लिए ये साधना की जाये वो वो कार्य सहज ही पूर्ण हो जाता है परन्तु जल्दबाजी न करे और संयम नियम के साथ साधना का आरम्भ करे ।

धूमवती बीज मंत्र साधना सिद्धि ( धूमावती महाविद्या के शक्ति का संचार आत्मा और सप्त शरीर में ग्रहण करने के लिए )
सर्पया विधि (जिस से धूमावती शक्ति साधना की समस्त शक्ति की स्थापना शरीर में हो सके)
मूल मंत्र और प्रत्यक्षीकरण विधान (निश्चित सफलता और पूर्ण रूप से प्रत्यक्ष दर्शन)

ये चरण किसी योग्य गुरु के माध्यम से ही प्राप्त करके करना चाहिए

साधना में कई प्रकार के विघ्न और रुकावट आती है जिस से हम हताश हो जाते है और निराशा घेर लेती है परन्तु एक साधक कभी भी घबराता नहीं और साधना को नियम पूर्वक करता जाता है क्युकी किसी भी पराशक्ति का अनुभव या कृपा ज्ञान सहज नहीं होता है अपितु इसकेलिए वर्षो परिश्रम करना होता है तब जेक किसी मनुष्य को ये सिद्धि प्राप्त होती है फिर भी बताने योग्य कुछ चीजे दी जा रही है जिस से लोगो का मार्गदर्शन हो सके

सफलता न मिल पाने के मुख्या कारण:
१. साधना में ऊर्जा की कमी होना या समर्पण न होना हीं भावना से ग्रषित होना
२. साधना के गुप्त सूत्रों का ज्ञान न होना, साधना में संसय होना, साधना के बारे में अधूरा ज्ञान होना

धूमावती साधना सिद्धि विधि

सबसे पहले साधना के पूर्व शमशान की मिटटी में शमशान की भस्म मिला कर गुलाबजल मिला के अंडाकार पिंड बना ले उसपे काजल से धूं लिखे ये साडी क्रिया रात्रि में करे और गुप्त रूप से ही करे किसी के सामने न करे और ना ही बिच में कोई टोके ये ध्यान दे । अब पिंड लेकर किसी कमरे में बैठ जाये और दक्छिण दिशा के और मुख रखे अब सफ़ेद वस्त्र से लकड़ी के पीढ़ी को धक् कर उसपे पिंड स्थापित करदे और पिंड पे अक्चत अर्पण करते हुए ये मंत्र बोले २१ बार (ॐ धूं शिवाय नमः ) इसके बाद भस्म पिंड पे अर्पित करते हुए ॐ धूं धूं ॐ का जप करे ५१ बार और तिल के टेल का डीप प्रज्वल्लित करते हुए धुप धुप दिखाए और जिस कार्य हेतु साधना करने जा रहे है उस कार्य के लिए संकल्प ले और पिंड के और देखते हुए ॐ धूं धूं धूमावती फट का जप पूर्ण रात्रि तक करे उसके बाद पिंड को काळा कपड़े में बांध कर उसी शमशान में फेक ए जिस जगह से आपने मिटटी और भस्म लेकर पिंड निर्माण किया था अगर इस साधना के बिच कोई डर लगे, कुछ अनुभव हो घबराये और डरे नहीं और साधना पूर्ण करे सफलता आपके समक्छ होगी ।

धूमवती तंत्र मंत्र साधना विधि २

शमशान से किसी सफ़ेद कफ़न का कपड़ा ले आये और उसपर शमशान की भस्म से शमशान के कोयले से निचे दिए गए मंत्र को लिख कर उस कपड़े को बहते हुए जल में बहा दे

ॐ धूं धूं धूमावती ठः ठः

यदि इस विधि को करते हुए अपने आसान के निचे कौवे का पंख रख लिया जाये और फिर ये विधि की जाये तो सफलता की संभावना बढ़ जाती है

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