जानिए क्या है आपकी आत्मा की वास्तविक उम्र

कहा जाता है कि जिन्दगी एक ऐसी यात्रा है जिसके हर पड़ाव पर हम कुछ ना कुछ नया, कुछ ना कुछ ऐसा सीखते हैं जो हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित होती है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार आत्मा एक है और वह अजर-अमर है, वह ना तो कभी जिन्दा होती है और ना ही कभी मरती है। बस नया शरीर धारण कर अपनी जीवनशैली को बदलती रहती है। तो इसका अर्थ यह स्पष्ट है कि हमारे शरीर में जो आत्मा मौजूद है उसकी आयु हमारे शरीर से बहुत ज्यादा होगी। आत्मा का आदि-अंत कुछ भी नहीं है तो यह भी जाहिर है कि हमारा शरीर छोड़ने के पश्चात वह फिर एक नए शरीर को धारण करने के लिए निकल जाएगी। पुराणों के अनुसार ना जाने कितनी योनियों को पार कर आत्मा मनुष्य शरीर को प्राप्त करती है और इस शरीर को धारण कर वह करीब सात जन्मों तक इस मृत्युलोक पर भ्रमण करती है। कभी आपने सोचा है कि हम सभी मनुष्य एक-दूसरे से अलग कैसे हो सकते हैं? जब हम सभी के शरीर में आत्मा का वास होता है तो फिर हम स्वभाव और आदतों के हिसाब से एक-दूसरे से अलग कैसे हो जाते हैं? इसका जवाब छिपा है आपकी आत्मा की उम्र में, अर्थात आपकी आत्मा की उम्र कितनी है, वह युवा है, शिशु है, प्रौढ़ है या वृद्ध, यही इस आपके वर्तमान जीवन में आपके स्वभाव और व्यवहार को प्रभावित करता है। पौराणिक दस्तावेजों के अनुसार उम्र के पैमाने पर आत्मा को 6 पड़ाव मुहैया करवाए गए हैं, चलिए जानते हैं आपकी आत्मा उम्र के कौन-से पड़ाव पर है। जिन लोगों की आत्मा अभी-अभी इस मृत्युलोक पर पहुंची हैं उन्हें नवजात आत्मा की श्रेणी में रखा जाएगा। इसका अर्थ है कि ऐसे लोगों में बचपना तो होगा ही साथ ही इनका स्वभाव गैर-जिम्मेदाराना और अपरिपक्व होता है। जीवन की जटिलताओं के प्रति ये लोग पूरी तरह अनजान रहते हैं। जिन लोगों के भीतर नवजात आत्मा होती है वे दिमाग से ज्यादा दिल से काम लेते हैं, वे हंसमुख और खुहमिजाज होते हैं। नवजात शिशुओं की ही तरह ये किसी से भी बैर नहीं रख पाते। इनके भीतर नैतिक मूल्यों और पारिवारिक संस्कारों की अधिकता रहती है। दूसरे स्थान पर है बालक आत्मा, जो अपने विकास को लेकर आगे बढ़ रही है। ये लोग जीवन की जटिलताओं और भीड़-भाड़ के बीच अपने लिए मार्ग तलाश करते हैं। मोह वश कभी-कभी ये लोग खुद अपने बनाए हुए नियम तो तोड़ डालते हैं, लेकिन बाद में अपराधबोध से ग्रस्त हो जाते हैं। जिन लोगों की आत्मा अभी बाल्यकाल में होती है वे लोग अपने समुदायों के प्रति गंभीर होते हैं। इनका जीवन सुरक्षा, स्थिरता और संरचना के आधार पर चलता है। इनकी बातें और क्रियाएं सब बंधे हुए होते हैं, जिसके चलते आप इन्हें रूढ़िवादी, पारंपरिक मान सकते हैं। ये अपने गलत-सही के बारे में तो जानते ही हैं लेकिन इस मामले में दूसरों को भी अच्छी राय दे सकते हैं। अगर आप विरोधी प्रवृत्ति के साथ-साथ रोमांचक और जिज्ञासु भी हैं तो समझ लीजिए आपकी आत्मा अभी अपने युवावस्था में है। हर मुद्दे और हर विषय पर ये लोग अपने अलग विचार रखते हैं, अन्य किसी से भी कहीं ज्यादा ये लोग अहंकार की भावना रखते हैं। इन्हें भौतिक वस्तुएं बहुत आकर्षित करती हैं। इनके लिए भौतिक सफलता, जैसे पैसे, ओहदा, आदि पर निर्भर करती है। इन लोगों को अपनी निजी स्वतंत्रता बहुत ज्यादा भाती है, अपने जीवन में ये किसी का भी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं कर सकते। इन्हें अपने काम से बहुत प्रेम होता है, ये निष्क्रिय होकर बिल्कुल नहीं बैठ सकते। अपने जीवन के उद्देश्यों को लेकर ये लोग बिल्कुल स्पष्ट होते हैं। इस श्रेणी में आने वाले ओग ये जानते हैं कि जीवन में कुछ भी बिना हाथ-पैर हिलाए नहीं मिल सकता, अगर कुछ बनना है तो मेहनत करनी ही पड़ेगी। ये चाहकर भी अपनी जिम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ सकते, इसलिए कभी-कभार इन्हें परेशानी भी हाथ लगती है। दूसरों से सहयोग पाने में ये अकसर सफल रहते हैं, ये अहंकार से ज्यादा जागरुक रहकर कार्य करते हैं। इनके भीतर त्याग और सहयोग की भावना इस कदर होती है कि कभी-कभार ऐसे रिश्ते का बोझ भी ये झेलते रहते हैं जिसमें अब प्राण नहीं बचे हैं। ये लोग काफी विचारशील होते हैं और दूसरों के लिए मिसाल पेश करते हैं। परिपक्व और वृद्ध आत्माओं में अंतर इतना है कि जहां परिपक्व आत्मा जीवन की गहराई को महत्व देती हैं वहीं वृद्ध आत्मा जीवन की ऊंचाई पर नजर रखती हैं। जिन लोगों के भीतर वृद्ध आत्मा होती है वे काफी समझदार होते हैं, छोटी-छोटी समस्याओं से प्रभावित ना होकर आगे बढ़ते रहते हैं। जिन उद्देश्यों को ये प्राप्त नहीं कर सकते, उस पर अपना समय ना बिताकर ये लोग आगे बढ़ते रहते हैं। वे आत्माएं जो वृद्धावस्था के भी आखिरी पड़ाव पर होती हैं, उनके भीतर आध्यात्मिकता बढ़ने लगती है, वे दुनिया में अध्यात्म को प्रचारित करते हैं, ये ज्यादा समय तक नीरस जिन्दगी नहीं जी सकते और ना ही एक लंबी अवधि के बाद अपने घर से दूर रह सकते हैं। इस श्रेणी में आने वाली आत्माओं की सूझबूझ और समझ पर प्रश्नचिह्न लगाना बेवकूफी ही होगी। ये जानते हैं कि अपने जीवन को लेकर किस तरह आगे बढ़ना है, इनसे गलती की अपेक्षा करना अपने आप में एक गलती होगी। इनके इस संसार में होने का अर्थ ही दूसरों में जागरुकता और अध्यात्म की समझ विकसित करना है। विभिन्न पड़ावों पर मौजूद आत्मा के भीतर क्या-क्या गुण होते हैं, ये तो हमने आपको बता दिए। इन बिंदुओं के आधार पर आप ही यह निर्धारित कीजिए कि आप किस श्रेणी में आते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *